संदीपन ऋषि के शिष्य थे श्रीकृष्ण और बलराम | सम्पादकीय

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संदीपन ऋषि के शिष्य थे श्रीकृष्ण और बलराम | सम्पादकीय


Monday, March 06 2017
Vikram Singh Yadav, Chief Editor ALL INDIA

संदीपन ऋषि के शिष्य थे श्रीकृष्ण और बलराम

 

1.पौराणिक साहित्य में श्रीकृष्ण के गुरु संदीपन ऋषि को बहुत सम्मान प्राप्त है। श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम ने संदीपन आश्रम में कुछ ही दिनों में चौंसठ कलाएँ सीखीं।

2. कंस वध
कंस वध
चौदह वर्ष की आयु में श्री कृष्ण ने मल्ल तथा मुष्टि युद्ध में अपने मामा सम्राट कंस को मार डाला। कंस वध के पश्चात श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता को कारागार से मुक्त कराया और मथुरा का समस्त राज्य अपने नाना उग्रसेन को सौंप दिया था।

3. ऋषि संदीपन गुरुकुल
ऋषि संदीपन गुरुकुल
इसके उपरांत वसुदेव और देवकी श्री कृष्ण तथा बलराम की विधिवत शिक्षा के लिए उन्हें लेकर संदीपन ऋषि के आश्रम में लेकर गए । ऋषि संदीपन परम तेजस्वी तथा सिद्ध ऋषि थे।

4. आज भी मौजूद है संदीपन आश्रम
आज भी मौजूद है संदीपन आश्रम
आजकल की उज्जैन नगरी के पास अवंतिका नगरी में तब संदीपन ऋषि का आश्रम हुआ करता था। आश्रम चारों और से घने वनों तथा फलों के पेड़ों से घिरा था ।

5. संदीपन आश्रम
संदीपन आश्रम 
उज्जैन के दर्शनीय स्थलों में आज भी गिना जाता है संदीपन आश्रम । इसकी विशेशात्यें अनेक हैं । यह एक शैव-वैष्णव सिद्ध पीठ माना जाता है ।

6. संदीपन ऋषि आश्रम का शिला पट्ट
संदीपन ऋषि आश्रम का शिला पट्ट
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित पुरातात्विक महत्व के शिलालेख के अनुसार संदीपन ऋषि के आश्रम में श्री कृष्ण, बलराम और उनके मित्र सुदामा ने लगभग 126 दिन तक अध्ययन किया ।

7. ऋषि संदीपन से पढ़ते हुए श्री कृष्ण तथा बलदाऊ
ऋषि संदीपन से पढ़ते हुए श्री कृष्ण तथा बलदाऊ
इस बीच श्री कृष्ण और बलराम विशेष रूप से धनुर्विद्या, अस्त्रविद्या, हस्ति-अश्व चालन और वैदिक साहित्य के सम्पूर्ण ज्ञान में प्रवीण हो गए ।

8. संदीपनी ऋषि स्वयं श्री कृष्ण को शिक्षा देते
संदीपनी ऋषि स्वयं श्री कृष्ण को शिक्षा देते 
संदीपनी ऋषि स्वयं श्री कृष्ण की प्रतिभा से चकित थे । बहुत ही काम समय में उन्होंने ना केवल सारी विद्याओं में दक्षताएं प्राप्त कीं ,बल्कि अन्य छात्रों तथा गुरुमाता की भी समय समय पर सहायता की ।

9. किशोर श्रीकृष्ण
किशोर श्रीकृष्ण
दीक्षा के उपरांत श्री कृष्ण ने अपनी गुरुमाता से आग्रह किया कि वे गुरु दक्षिणा की आज्ञा करें। इस पर गुरुमाता ने कृष्ण से गुरु दक्षिणा में अपना वह पुत्र सुकर्म वापस माँगा, जो प्रभास क्षेत्र में जल में डूबकर मर गया था।

10. सिद्धिदात्री देवी
सिद्धिदात्री देवी
गुरु माता को श्रीकृष्ण सिद्धिदात्री माँ के समान मानते थे । वस्तुतः सुकर्म बह कर किसी तरह सौराष्ट्र (वर्तमान गोवा) के पास महिषी द्वीप चला गया था। वहां की रानी रम्भा मातृ-सत्तात्मक प्रणाली से राज्य चलाती थी। उसने सुकर्म को अपना दास-पति बना लिया था। समस्या यह थी सुकर्म को वापस कैसे लाया जाए ?

11. मित्रों के साथ श्रीकृष्ण
मित्रों के साथ श्रीकृष्ण
बलराम और कुछ मित्रों के साथ सुकर्म को वापस लाने दो नौकाओं में श्रीकृष्ण सौराष्ट्र गए । उन्हें देख रानी ने अपना पति बनाने का प्रस्ताव किया । श्रीकृष्ण ने सुकर्म से युद्ध करने की इच्छा व्यक्त की और छल से उसे समुद्र तट तक ले गए । वहीं से वे लोग नौकाओं में बैठ कर वापस आ गए ।

12. उत्कृष्ट शिष्य ही गुरुओं को महान बनाते हैं
उत्कृष्ट शिष्य ही गुरुओं को महान बनाते हैं
संदीपन ऋषि ने पुत्र को वापस पाकर सबके सामने कहा कि गुरुओं की महानता शिष्यों के कारण ही होती है । सब कुछ जानकर भी जो काम मैं नहीं कर पाया वह कार्य मेरे शिष्य ने मेरे अन्य शिष्यों और अपने मित्रों की सहायता से कर दिखाया । उन्होंने गुरुकुल के आचार्यों से कहा किसी भी शिष्य को कभी तुच्छ ना समझना। शिष्यों से ही गुरु का सम्मान है ।