महेंद्र सिंह राजपूत ( मंत्री) जी के प्रयासों से सरीला में एक बार फिर फिल्म स्टारों की धूम | हमीरपुर

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महेंद्र सिंह राजपूत ( मंत्री) जी के प्रयासों से सरीला में एक बार फिर फिल्म स्टारों की धूम | हमीरपुर


Monday, January 30 2017
अमित कुमार, सहसंपादक बुंदेलखंड

महेंद्र सिंह राजपूत ( मंत्री)  जी के प्रयासों से सरीला में एक बार फिर  फिल्म स्टारों की धूम

अमित शुक्ला :- बुंदेलखण्ड सम्पादक -

 सरीला में सैफई  महोत्सव कि तरह बॉलीवुड नाइट का 26 फरवरी को आयोजन -

सरीला में 14 से 26 फरवरी तक महाशिवरात्रि महोत्सव

            बुन्देलखण्ड मे हमीरपुर जनपद के सरीला में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी 44वेंं  महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है । महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों व मेले का आयोजन, भागवत महापुराण व रात में बुंदेली विधाओं पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट के साथ विभिन्न विधाओं की प्रतियोगिता भी होगी 

           महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन पर  बालीबुड नाइट मे 26 फरवरी को फिल्मी हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम के संयोजक महेंद्र कुमार राजपूत ने बताया कि गोविन्दा, सुनील सेट्टी, रनीना टंडन युविका चौधरी, मरयम जकारिया, असरानी, गुलशन ग्रोवर, विकल्प महता, संजीता शेख, हप्पू सिन्ह ( योगेश त्रिपाठी) हेमंत बृजवानी सहित कई फिल्मी जगत की मशहूर हस्तियां भी शिरकत करेंगी।

        विधान सभा चुनाव कि वोटिंग 23 फरवरी को होने के बावजूद बडी मसक्कद से तथा  महेंद्र राजपूत (मंत्री )जी के प्रयास से 14 से 26 फरवरी तक  महाशिवरात्रि  महोत्सव का विशाल आयोजन किया जा रहा है

 

एक नजर सरीला के गौरवशाली इतिहास पर :-

               सरीला स्टेट जनपद हमीरपुर का एक अति पिछड़ा क्षेत्र है, यह क्षेत्र अपने आप मे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है ! कई तपस्वीयों व    ऋषि मुनियों की कर्मभूमि रहा है यह क्षेत्र !  जहां के अवशेष अपने गर्भ में एक लंबा इतिहास छिपाये हुये है, बुंदेलखंड का इतिहास महाभारत काल से माना जाता है महाभारत काल में सोलह महाजनपद थे जिनमें से एक जनपद चेदिन था जिसको आज बुंदेलखंड के नाम से जाना जाता है चेदि महाजनपद की राजधानी शुक्तिमती थी, इस जनपद के प्राचीनतम राजा शिशुपाल थे जिन्हे श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से मारा था !

                   इसी प्राचीनतम अच्छेचेदि  प्रदेश का छोटा सा हिस्सा है -सरीला जिसमें अति प्राचीन तम शिवलिंग स्थापित हैं "शल्लेश्वर मंदिर "में ! जिसकी वजह से लाखों श्रद्धालु अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने इस मंदिर में उपस्थित होते हैं, आज भी लाखों लोग महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस मंदिर में इस शल्लेश्वर धाम मे माथा टेकने आते हैं !

                    ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बुंदेलखंड में गुप्त काल को स्वर्ण युग माना गया है गुप्त काल में इस क्षेत्र में मंदिरों, गुफाओं,और वास्तुकला का उदय हुआ उससे पहले मंदिरों का उल्लेख नहीं मिलता है, बुंदेलखंड क्षेत्र में मंदिरों का निर्माण गुप्त काल में शुरू हुआ और चंदेल काल तक उसका विस्तार चरम पर था बुंदेलखंड में चंदेलों का सम्राट 9वीं सताब्दी में स्थापित हुआ! चंदेल काल में प्रथम राजा चंद्रेवर्धन थे जो चंद्रवंशी क्षत्रिय थे, बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा मंदिरों का निर्माण चंदेल काल में हुआ राजा परम लाल 1202 तीसरी में कुतुबुद्दीन एबक से पराजित होकर कालिंजर चले गये थे,फिरये क्षेत्र मुस्लिम शासकों के अधीन हो गया था इस चेदि  प्रदेश या बुंदेलखंड में विशालकाय मंदिरों की स्थापना हुई जो आज पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं !

                    श्री शल्लेश्वर धाम सरीला में प्राचीनतम शिवलिंग हैं यहा  पर बने मठ को देखने से प्रतीत होता है कि उनका निर्माण गुप्तकाल एवं चंदेल काल के मध्य हुआ भगवान शिव के शिवलिंग को देखें तो  चंदेलकाल के पूर्व का निर्माण माना जा सकता है ,और मठ में गुम्बद दीवार होने से  यह चंदेलकालीन प्रतीत होता है सरीला स्टेट की वंशावली महाराजा छत्रसाल से प्रारंभ हुई! आज  सरीला स्टेट हमीरपुर जनपद की एक तहसील है यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के पावन वर्ष पर लाखों श्रद्धालु इस शिवलिंग पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित  करने आते हैं !

"अमित शुक्ला (धौहल) सम्पादक 'विषेश रिपोर्ट महाशिवरात्रि महोत्सव"