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फर्जी मनरेगा मजदूरों के द्वारा ग्राम छिमौली मे बिन काम ही हो रहा लाखों का घोटाला। | हमीरपुर


Tuesday, November 03 2015
Shashiven, Joint Editor ALL INDIA

फर्जी मनरेगा मजदूरों के द्वारा ग्राम छिमौली मे बिन काम ही हो रहा लाखों का घोटाला।


’’मनरेगा मजदूरो के द्वारा दो लाख के फर्जी भुगतान के सम्बन्ध मे की गयी शिकायत तहसील दिवस के रजिस्टर मे दर्ज नही की गयी जिससे शिकायत कर्ता मजदूर मायूस दिखे।’’

’’मनरेगा के घोटाले को अपने शिकायत जांच रजिस्टर मे दर्ज करते हुये कपलिंग लेटर लगाकर जांच करवायेगे व दोषियों को बक्शा नही जायेग,- उपजिला अधिकारी मौदहा श्री किशोर गुप्ता’’ 

मौदहा हमीरपुर। ग्राम छिमौली मे बिन काम के ही फर्जी मनरेगा मजदूरों के द्वारा लाखों का हेर फेर करते हुये बडा घोटाला सामने आया है जिसकी शिकायत आज तहसील दिवस मे ग्राम के लगभग एक सैकडा मजदूरो ने करते हुये बताया कि हम सभी ग्राम छिमौली के मजदूर है व हम लोगो ने ग्राम छिमौली मे मनरेगा के अन्र्तगत महिमारा नाला रेलवे पुलिया से शिद्व बाबा तक व सजाद नाला रेलवे पुल से गंगा के खेत तक का र्काय किया था। जिसका भुगतान किया जा रहा है परन्तु ग्राम सेवक को हस्ताक्षर के लिये मिले मस्टरोल को देखकर पता चला कि कागजो मे दर्ज कुछ मजदूर ही वास्तविक मजदूर है व अधिकतर मजदूर फर्जी है जिनको बिना काम के ही भ्रष्ट अधिकारियों की मिली भगत लगभग दो लाख रू0 का फर्जी भुगतान किया जा रहा है। जिसपर वास्तविक मनरेगा मजदूरो ने फर्जी मनरेगा मजदूरी के भुगतान मे शामिल अधिकारियों पर दण्डनात्मक र्कायवाही करते हुये अपने काम का भुगतान करने की मांग की।शिकायत कर्ताओ म राम प्यारी , कल्ली, बाबादीन, हरिलाल सहित एक सैकडा महिला व पुरूष मनरेगा मजदूर फर्जी मनरेगा मजदूर कागजो मे दर्ज होने से दुखी दिखे।


बता दे कि विकाश खण्ड मौदहा के अधिकतर ग्रामो मे मनरेगा मजदूरो के साथ छल किया जा रहा है वास्तविक मनरेगा मजदूर काम के अभाव मे पलायन को मजबूर है जबकि फर्जी जाब र्काड धारको के द्वारा सम्बन्धित ग्राम के सचिव व प्रधान जमकर घोटाले करने मे मगन है वही अधिकतर ये मामले आसानी से उठते नहीं यदि कोई शिकायत कर्ता ऐसे घोटालो पर शिकायत करता है तो जांच के नाम पर मामले मे चुप्पी साध ली जाती है और अन्त मे मामला टांय टांय फिस्स हो जाता है। सूत्र बताते है कि उक्त घोटाले चेन सिस्टम के तरह होते है व विकाश खण्ड मौदहा मे एफ0टी0ओ0 के माध्यम से भी मनरेगा मजदूरो के नाम पर अपने चहितो के खाते दर्ज करते हुये धन आसानी से हस्तान्तरित होता है व वास्तविक मनरेगा मजदूर अपनी पास बुक लिये अधिकारियों के चक्कर लगाता रहता है। खैर मामला कुछ भी हो पर मनरेगा के वास्तविक उददेश्य की पूर्ति सम्बन्धित अधिकारियों की अनदेखी के चलते नही की जा रही जिसकारण वास्तविक मजदूर काम के अभाव मे महानगरों की ओर पलायन को मजबूर है।


 

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