अब गुलछर्रे नहीं उड़ा सकेंगे टैक्स चोर, कार्रवाई की तैयारी में सरकार मे लगी/ | नयी दिल्ली

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अब गुलछर्रे नहीं उड़ा सकेंगे टैक्स चोर, कार्रवाई की तैयारी में सरकार मे लगी/ | नयी दिल्ली


Wednesday, February 01 2017
Vikram Singh Yadav, Chief Editor ALL INDIA

अब गुलछर्रे नहीं उड़ा सकेंगे टैक्स चोर, कार्रवाई की तैयारी में सरकार मे लगी/

                                                                         UFH न्यूज़

नई दिल्ली,.... टैक्स चोरी कर गुलछर्रे उड़ाने वाले लोग अब बच नहीं सकेंगे। सरकार ने ऐसे लोगों की आय और व्यय के बारे में आंकड़े जुटा लिए हैं। खास कर नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा हुए पुराने नोटों के आंकड़ों ने इस मामले में आय कर विभाग के हाथ और मजबूत कर दिए हैं। सरकार आने वाले दिनों में ऐसे लोगों से टैक्स वसूलेगी जिससे कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार के पास धन आएगा। 

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का टैक्स-जीडीपी अनुपात बेहद कम है। प्रत्यक्ष कर और परोक्ष कर अनुपात भी सामाजिक न्याय की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में कर चोरी भी अधिक है। आंकड़े पेश करते हुए कहा कि देश में संगठित क्षेत्र में 4.2 करोड़ लोग काम करते हैं जबकि आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले वेतनभोगी व्यक्तियों की संख्या मात्र 1.74 करोड़ है। इसी तरह असंगठित क्षेत्र में 5.6 करोड़ व्यक्गित उद्यम और फर्म कारोबार कर रहे हैं लेकिन आय कर रिटर्न दाखिल करने वाले इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या भी मात्र 1.81 करोड़ है। 

कंपनियां 13.94 जबकि टैक्स देती सिर्फ 5.97 लाख कंपनियां

31 मार्च 2014 तक देश में 13.94 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं जिनमें से मात्र 5.97 लाख कंपनियों ने ही आंकलन वर्ष 2016-17 के लिए रिटर्न दाखिल किया है। इतना ही नहीं रिटर्न दाखिल करने वाली 5.97 लाख कंपनियों में से 2.76 लाख कंपनियों ने अपनी आय या तो जीरो दिखायी है या फिर घाटा दिखाया है। सिर्फ 2.85 लाख कंपनियां ही ऐसी हैं जिन्होंने अपना करपूर्व लाभ एक करोड़ रुपये से अधिक दिखाया है। वहीं 28,667 कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने लाभ एक करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये के बीच दिखाया है। देश में सिर्फ 7781 कंपनियां ही ऐसी हैं जिन्होंने अपना कर पूर्व लाभ 10 करोड़ रुपये से अधिक दिखाया है।

पांच लाख से ज्यादा कमाने वाले सिर्फ 76 लाख लोग 

वित्त मंत्री ने कहा कि 2015-16 में रिटर्न दाखिल करने वाले 3.6 करोड़ व्यक्तियों में से 99 लाख ने अपनी वार्षिक ढाई लाख रुपये से कम दिखायी है। वहीं 1.95 करोड़ रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं ने अपनी आय 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच दिखायी है। सिर्फ 52 लाख लोगों ने अपनी आय 5 से 10 लाख रुपये के बीच दिखायी है। वहीं 24 लाख लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सालाना आय 10 लाख रुपये से अधिक दिखायी है। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि पांच लाख रुपये से अधिक आय दिखाने वाले 76 लाख लोगों में से 56 लाख वेतनभोगी हैं। इसी तरह सालाना 50 लाख रुपये से अधिक आय दिखाने वाले देश में सिर्फ 1.72 लाख लोग हैं। दूसरी ओर यह हकीकत यह है कि बीते पांच साल में देश में 1.25 करोड़ गाडि़यां बेची गयी हैं और 2015 में दो करोड़ भारतीय कारोबार करने या घूमने फिरने विदेश गए हैं। 

व्यापक कर चोरी 

इन आंकड़ों से निष्कर्ष निकलता है कि भारतीय समाज व्यापक रूप से कर अनुपालन न करने वाला समाज है। जेटली ने कहा कि अर्थव्यवस्था में नकदी की प्रचुरता की वजह से लोगों के लिए करों से बचना संभव होता है। जब बहुत लोग कर चोरी करते हैं तो इनके हिस्से का भार उन लोगों पर पड़ता है जो ईमानदारी से टैक्स देते हैं।

 1.48 करोड़ बैंक खातों में जमा हुए 80 लाख रुपये से अधिक

जेटली ने कहा कि नोटबंदी के बाद 8 नवंबर से 30 दिसंबर के दौरान लगभग 1.09 करोड़ बैंक खातों में दो लाख रुपये और 80 लाख रुपये के बीच धनराशि पुराने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट के रूप में जमा हुए। इन खातों में औसतन 5.03 लाख रुपये जमा हुए। इसी तरह 1.48 बैंक खातों में प्रत्येक में 80 लाख रुपये से अधिक जमा हुए। इन खातों में औसतन 3.31 करोड़ रुपये जमा 

 

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