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मदरसों में ध्वजारोहण और राष्ट्रगान का आदेश बेजा: देवबंदी उलमा | सहारनपुर


Friday, August 11 2017
Vikram Singh Yadav, Chief Editor ALL INDIA

मदरसों में ध्वजारोहण और राष्ट्रगान का आदेश बेजा: देवबंदी उलमा

15 अगस्त को मदरसों में ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के आदेश पर उलमा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किये। कहा कि मदरसे हमेशा से राष्ट्रीय पर्व धूमधाम से मनाते हैं। इसके बावजूद इस सरकार का इस तरह का आदेश बेजा है। उधर बरेली के मदरसा दारूल उलूम मुफ्ती ए आजम सिराज रजा खान नूरी का कहना है कि हमारे यहां हर साल पंद्रह अगस्त धूमधाम से मनाया जाता रहा है। सभी आयोजन होते हैं। मुफ्ती मो. इश्हाक मियां ने कहा कि आजादी का जश्न पूरी शानो शौकत के साथ मनाया जाएगा। 

दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मुफ्ती शरीफ कासमी ने कहा कि मदरसों में वतनपरस्ती और भाईचारे की शिक्षा दी जाती है। मदरसों में हमेशा राष्ट्रीय पर्व पर झंडारोहण व राष्ट्रगान गाया जाता है। इस दिन कार्यक्रमों का आयोजन कर देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों को भी याद करते हैं। इसके बावजूद इस तरह के आदेश से हुकूमत की नीयत पर सवाल खड़ा होता है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि जंगे आजादी मे मदरसों और उलेमा ने अहम भूमिका निभाई है। लेकिन आज मदरसों को शक की निगाह से देखा जा रहा है जो बदकिस्मती है। हुकूमत का यह फैसला निंदनीय है।

आल इंडिया अल कुरान फाउंडेशन अध्यक्ष मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि मदरसों मेें हमेशा से अमन और वतन से मोहब्बत करने की तालीम दी जाती है। 1947 के बाद से ही मदरसों में कौमी पर्व हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। ऐसे में मदरसों को शक की निगाह से देखना और ध्वजारोहण के समय उनकी वीडियोग्राफी कराने की बात कहना मदरसों और अल्पसंख्यकों के देशप्रेम को संदिग्ध बनाना है। उधर मदरसों में हर साल ध्वजारोहण होता है। सारे जहां से अच्छा हिंदू सिंता हमार भी गाते हैं पर राष्ट्रगान यानी जन गण मन अधिनायक जय है नहीं गा सकते हैं।