वाराणसी में अब रेल लाइन के किनारे होगा इको फ्रेंडली टॉयलेट | वाराणसी

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वाराणसी में अब रेल लाइन के किनारे होगा इको फ्रेंडली टॉयलेट | वाराणसी


Friday, October 13 2017
Vikram Singh Yadav, Chief Editor ALL INDIA

वाराणसी में अब रेल लाइन के किनारे होगा इको फ्रेंडली टॉयलेट

शहर और गांवों के बाद अब रेलवे की पटरियों को भी खुले में शौचमुक्त बनाने की कसरत शुरू हुई है। शहरी विकास मंत्रलय ने इस संबंध में नगर निगम से विस्तृत सर्वे रिपोर्ट मांगी है। उन स्थानों को चयनित कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, जहां रेललाइन से 15 मीटर की दूरी पर लोग बसे हैं और उनके घरों में शौचालय नहीं है।

नित्य क्रिया के लिए रेल लाइन अथवा किनारे खुले में शौच के लिए जाना मजबूरी है। इन जगहों पर मोबाइल अथवा इको फ्रेंडली टॉयलेट स्थापित करने का अभियान चलेगा। बता दें कि शहर के 90 वार्डो को दिसंबर 2017 तक खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित है। हालांकि, नगर निगम ने कुछ दिन पहले वार्डो को स्वत: ओडीएफ घोषित कर दिया है।

अब इस पर जनता से आपत्तियां मांगी गई हैं। संभव है कि वार्ड खुले में शौचमुक्त हो जाएंगे, लेकिन रेलवे लाइन के किनारे अनधिकृत रूप से रहने वाले निचले तबके के लोग टॉयलेट के अभाव में पटरियों या रेलवे जमीन पर यूं ही गंदगी फैलाते रहेंगे। तर्क है कि जब तक ऐसे लोगों के लिए शौचालय की उपयुक्त व्यवस्था नहीं होती, तब तक वार्ड व गांवों को पूरी तरह खुले में शौचमुक्त नहीं माना जा सकता।

ऐसे में उन कुनबों की तलाश करें, जो रेलवे लाइन या उसके किनारे शौच करने जाते हैं। इन परिवारों के लिए मोबाइल या इको फ्रेंडली टॉयलेट की व्यवस्था होने पर ही स्वच्छ भारत मिशन वास्तव में धरातल पर उतर पाएगा।

खुले में शौच रोकने पर रेलवे सहमत: रेलवे मंत्रलय की भूमि पर खुले में शौच रोकने की पहल युद्धस्तर पर शुरू होगी। रेलवे ने सहमति भी दे दी है। बनारस समेत देश के 500 शहरों में नगर निगम मोबाइल टॉयलेट स्थापित करने को काम करेगा। काशी में रेलवे की जमीन पर बसी 200 से अधिक छोटी- बड़ी बस्तियों में अभियान चलाया जाएगा।